हरिद्वार

हीराबेन मोदी की तृतीय पुण्यतिथि पर हरिद्वार के वैष्णो देवी लाल माता मंदिर में श्रद्धांजलि सभा एवं पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम

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हरिद्वार, भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूज्य माताजी स्वर्गीय हीराबेन मोदी की तृतीय पुण्यतिथि पर हरिद्वार के प्रसिद्ध वैष्णो देवी लाल माता मंदिर परिसर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंदिर के संचालक भक्त दुर्गा दास ने एक पेड़ मां के नाम पर संत-महात्माओं के साथ मिलकर मां हीराबेन के नाम पर रुद्राक्ष का पौधारोपण किया, जो पर्यावरण संरक्षण और मातृ भक्ति का अनूठा संदेश देता है।

कार्यक्रम में संतों को कम्बल, फल तथा दक्षिणा वितरित की गई, जिससे ठंड के मौसम में साधु-संतों को राहत मिली। श्री अखंड परम धाम के परमाध्यक्ष स्वामी परमानंद गिरि महाराज ने अपने संदेश में कहा कि भक्त दुर्गा दास ने माता हीराबेन की स्मृति में मंदिर परिसर में उनकी मूर्ति स्थापित करवाई है, जो मातृ शक्ति और सनातन संस्कृति का प्रतीक है। स्वामी जी ने आगे कहा कि हीराबेन जी का जीवन सादगी, त्याग और भक्ति का आदर्श था, जो प्रधानमंत्री मोदी जी के व्यक्तित्व में स्पष्ट झलकता है।

मंदिर संचालक भक्त दुर्गा दास ने कहा कि हीराबेन मोदी जी ने पूरे देश को एक आदर्श मां का स्वरूप दिखाया। उनकी पुण्यतिथि पर यह आयोजन मातृ भक्ति को समर्पित है। रुद्राक्ष का पेड़ लगाकर हम पर्यावरण की रक्षा और मां की स्मृति को चिरस्थayi बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यह पेड़ भविष्य में भक्तों को छाया और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करेगा।

इस अवसर पर पंडित हेमंत थपलियाल, पंडित हीरा बल्लभ जोशी, पंडित जगदंबा प्रसाद, विनय मोहन, राकेश सकलानी, दीवान सिंह राणा, अश्वनी दीक्षित तथा अमृतसर से पधारी संगत और लखनऊ से आए अधिवक्ताओं ने भाग लिया। सभी ने मिलकर हीराबेन मोदी जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीर्घायु जीवन की कामना की।

वैष्णवी देवी लाल माता मंदिर, जो जम्मू की वैष्णो देवी की तरह गुफा शैली में निर्मित है, हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में स्थित है। यहां मां वैष्णो देवी की तीन पिंडियों की तरह महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर में हीराबेन मोदी जी की मूर्ति की स्थापना से यह स्थान अब मातृ भक्ति का प्रमुख केंद्र बन गया है। कार्यक्रम में भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण भी हुआ, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया।

यह आयोजन न केवल एक पुण्यतिथि स्मरण था, बल्कि सनातन धर्म में मां की महिमा, पर्यावरण संरक्षण और सेवा भाव को बढ़ावा देने वाला था।

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