उत्तराखंडहरिद्वार

चढ़ावा चोरी रोकने को मनसा देवी मंदिर में सख्ती, सात सदस्यीय निगरानी समिति गठित

 

पुजारियों व कर्मचारियों को दिलाई ईमानदारी की शपथ, चोरी करते पकड़े जाने पर होगी एफआईआर और जेल

हरिद्वार, सोमवार। मंदिरों में चढ़ावे की धनराशि में कथित गड़बड़ी और चोरी के मामलों के बीच हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष तथा निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने मंदिर के पुजारियों एवं कर्मचारियों को ईमानदारी और सुचिता बनाए रखने की शपथ दिलाई। साथ ही चढ़ावे की निगरानी के लिए सात सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया गया।

बैठक के दौरान श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने स्पष्ट कहा कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दानराशि का निजी उपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई पुजारी या कर्मचारी चढ़ावे की धनराशि का दुरुपयोग अथवा चोरी करते हुए पाया गया, तो उसे तत्काल सेवा से निष्कासित किया जाएगा और उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न प्रमुख मंदिरों में चढ़ावे से जुड़े विवाद सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन ने पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है। इसके लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जो मंदिर की व्यवस्थाओं और चढ़ावे की निगरानी करेगी।

श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि मंदिर में आने वाली दानराशि श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है और उसकी सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या चोरी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गौरतलब है कि हाल ही में अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले में एसआईटी का गठन किया गया था, जबकि उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में भी कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद बीकेटीसी द्वारा संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन घटनाओं के बाद हरिद्वार के संत समाज ने भी दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है। इसी क्रम में मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट द्वारा उठाया गया यह कदम मंदिरों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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