उत्तराखंडहरिद्वार

13 निराश्रित परिवारों को पक्की छत दिलाएगी निस्वार्थ कदम संस्था

50 जरूरतमंद परिवारों में से 13 को मकान के लिए देगी अनुदान राशि

हरिद्वार। बैरागी कैंप में वर्षों से झुग्गी-झोपड़ियों में जिंदगी गुजार रहे निराश्रित और जरूरतमंद परिवारों के लिए निस्वार्थ कदम संस्था ने बड़ी पहल की है। संस्था ने अब जरूरतमंदों को सिर्फ भोजन और राशन उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें पक्की छत और सम्मानजनक जीवन देने का बीड़ा उठाया है। संस्था ने 50 परिवारों में से पहले चरण में 13 परिवारों को मकान निर्माण के लिए अनुदान राशि देने का निर्णय लिया है।

रविवार को बैरागी कैंप में आयोजित प्रेस वार्ता में संस्था के सदस्य रोहित वर्मा ने बताया कि निस्वार्थ कदम संस्था पिछले करीब दस वर्षों से क्षेत्र के निराश्रित और जरूरतमंद लोगों के बीच सेवा कार्य कर रही है। संस्था की ओर से जरूरतमंद परिवारों को भोजन, राशन और दवाएं उपलब्ध कराने के साथ उनकी अन्य आवश्यकताओं में भी सहयोग किया जाता है।

उन्होंने बताया कि बैरागी कैंप में लंबे समय से कई परिवार झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे हैं। इन परिवारों की स्थिति सुधारने के लिए संस्था ने सरकार और प्रशासन से भी बातचीत की, लेकिन बैरागी कैंप की भूमि सिंचाई विभाग के अधीन होने के कारण वहां स्थायी मकान बनवाने में दिक्कत सामने आई। इसके बाद संस्था ने परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी दी और उन्हें योजना का लाभ दिलाने के प्रयास शुरू किए।

रोहित वर्मा के अनुसार अन्नैकी गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक मकान की कीमत करीब छह लाख रुपये है, जिसमें लाभार्थी को लगभग तीन लाख रुपये स्वयं जमा करने होते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना मुश्किल है। ऐसे में संस्था ने इन परिवारों की मदद करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल 50 परिवारों में से 13 परिवारों को मकान के लिए अनुदान राशि उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है। संस्था का प्रयास है कि आगे अन्य जरूरतमंद परिवारों को भी इस योजना का लाभ दिलाया जा सके।

रोहित वर्मा ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल जरूरतमंदों को भोजन या राशन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उन्हें स्थायी सहारा देकर आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर देना है। संस्था चाहती है कि निराश्रित परिवार झुग्गियों में रहने के बजाय अपने पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन बिता सकें।

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