उत्तराखंडहरिद्वार

बाबा हठयोगी के नेतृत्व में सनातन की आवाज होगी और बुलंद

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने किया श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल के नवनिर्वाचित अध्यक्ष का स्वागत

हरिद्वार। श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल के अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद बाबा हठयोगी का शनिवार को चंडीघाट स्थित गौरीशंकर गौशाला में संत समाज ने स्वागत किया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने बाबा हठयोगी को फूलमाला पहनाकर और शॉल ओढ़ाकर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बाबा हठयोगी प्रखर वक्ता होने के साथ संत समाज के भीष्म पितामह हैं। सनातन और धर्म से जुड़े विषयों पर वह बेबाकी से अपनी बात रखते हैं।

श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने कहा कि बाबा हठयोगी के नेतृत्व में श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल संत परंपरा के संरक्षण और सनातन संस्कृति के संवर्द्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में बाबा हठयोगी ने अपनी जिम्मेदारी कुशलता से निभाई है। धर्म और अध्यात्म के प्रचार-प्रसार के साथ उन्होंने अपने ओजस्वी विचारों से समाज को हमेशा दिशा देने का काम किया है। राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करने में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती और महामंडलेश्वर स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी ने भी बाबा हठयोगी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बाबा हठयोगी के अध्यक्ष निर्वाचित होने से संत समाज में हर्ष है।

बाबा हठयोगी ने सभी संतों का आभार जताते हुए कहा कि श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल के अध्यक्ष के रूप में संत समाज के हितों की रक्षा और सनातन धर्म का संरक्षण-संवर्द्धन उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी सरल, सहज और मृदुभाषी संत हैं। उनके नेतृत्व में अगले वर्ष हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में होने वाले कुंभ मेलों को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के लिए संत समाज एकजुट होकर कार्य करेगा।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज,महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि महाराज,स्वामी सहजानंद पुरी, महंत वीरेंद्र गिरी, महंत प्रज्ञानंद गिरी, स्वामी हरिवल्लभदास शास्त्री, स्वामी अनंतानंद गिरी, महंत राज गिरी समेत कई संत-महंत और श्रद्धालु मौजूद रहे।

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