उत्तराखंडहरिद्वार

देश की एकता-अखंडता और संस्कृति का संदेश देगी दंडवत यात्रा: करौली शंकर

30 अक्टूबर को दक्ष मंदिर से होगा शुभारंभ, कुंभ के निर्विघ्न आयोजन के लिए भी करेंगे प्रार्थना

 

हरिद्वार में पहली बार निकलेगी दंडवत यात्रा, जमीन पर लेटकर हरकी पैड़ी पहुंचेंगे 10 से 12 हजार श्रद्धालु

यूके न्यूज /लक्ष्य

हरिद्वार। धर्मनगरी में आस्था का अनूठा नजारा देखने को मिलेगा। हजारों श्रद्धालु जमीन पर लेटकर दंडवत करते हुए कनखल के दक्ष मंदिर से हरकी पैड़ी तक पहुंचेंगे। 10 से 12 हजार श्रद्धालुओं की सहभागिता वाली इस दंडवत यात्रा में भक्ति के साथ देश की एकता-अखंडता और भारतीय संस्कृति का संदेश भी गूंजेगा। 30 अक्टूबर को शुरू होने वाली यात्रा करीब 30 से 35 घंटे में पूरी होगी। आयोजकों के मुताबिक, हरिद्वार में पहली बार इतने बड़े स्तर पर दंडवत यात्रा निकाली जाएगी।

मंगलवार को मिश्री मठ में आयोजित प्रेस वार्ता में नया अखाड़ा के महामंडलेश्वर एवं अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक करौली शंकर महाराज ने यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दंडवत यात्रा के माध्यम से देश की एकता-अखंडता, सामाजिक सद्भाव और भारतीय सभ्यता-संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संदेश दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर को कनखल स्थित दक्ष मंदिर में रुद्राभिषेक और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद यात्रा का शुभारंभ होगा। यहां से श्रद्धालु दंडवत करते हुए शंकराचार्य चौक, तुलसी चौक और अपर बाजार होते हुए हरकी पैड़ी पहुंचेंगे। यात्रा में देश के विभिन्न हिस्सों से 10 से 12 हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। 30 अक्टूबर को शुरू होने वाली यात्रा 31 अक्टूबर को हरकी पैड़ी पहुंचेगी।

करौली शंकर महाराज ने बताया कि इससे पहले उत्तर प्रदेश में भी उनके सानिध्य में दंडवत यात्रा निकाली जा चुकी है, जिसे पूरा करने में सात महीने का समय लगा था। हरिद्वार में आयोजित यात्रा धार्मिक आस्था के साथ राष्ट्रीय एकजुटता का संदेश भी देगी।

यात्रा के हरकी पैड़ी पहुंचने के बाद श्रद्धालु सफाई अभियान चलाएंगे। इसके बाद शाम को गंगा आरती में शामिल होकर मां गंगा की आराधना करेंगे। श्रद्धालु आगामी कुंभ मेले के सफल और निर्विघ्न आयोजन के लिए भी प्रार्थना करेंगे। यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए आयोजकों की ओर से एक हजार वालंटियर तैनात करने की बात कही गई है। प्रेस वार्ता में निजी सचिव डॉ. उमेश सचान सहित कई संत मौजूद रहे।

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