उत्तराखंडहरिद्वार

श्री निर्धन निकेतन आश्रम में हर्षोल्लास से मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव

 

* *संतों ने गुरु की महिमा का किया बखान, संस्कृत भाषा एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण का लिया संकल्प

हरिद्वार। सनातन संस्कृति एवं धार्मिक शिक्षा को समर्पित उत्तरी हरिद्वार खड़खड़ी स्थित प्रख्यात धार्मिक संस्था श्री निर्धन निकेतन आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव परमाध्यक्ष ऋषिराम कृष्ण महाराज के पावन सानिध्य में श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आश्रम में धार्मिक अनुष्ठान, गुरु पूजन एवं संत-महंतों के आशीर्वचन का आयोजन हुआ। श्रद्धालु भक्तों ने गुरु चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने जीवन में गुरु के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर आश्रम के परमाध्यक्ष ऋषिराम कृष्ण महाराज ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु ही शिष्य के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाकर उसे सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव महाराज ने संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति को समर्पित भाव से आगे बढ़ाने के लिए अपना संपूर्ण जीवन लगा दिया। उनका उद्देश्य संस्कृत भाषा के संरक्षण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, वेदों और सनातन परंपराओं से जोड़ना था।

उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक विरासत की आधारशिला है। संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समाज को सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती महाराज ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझना कठिन है। गुरु अपने शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान और सत्य के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।

उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव महाराज का जीवन त्याग, तपस्या, साधना और सेवा का प्रतीक रहा। उन्होंने संस्कृत भाषा, धर्म और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए जो कार्य किए, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि संतों और महापुरुषों की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति की महान परंपराओं को मजबूत करने के लिए समाज को एकजुट होकर कार्य करना होगा। संस्कृत भाषा के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ने का आह्वान किया।

गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान आश्रम में श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर संत-महंतों ने सनातन धर्म, गुरु महिमा, संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

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