हरिद्वार

कुंभ भारतीय सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा : डॉ. रविंद्र पुरी

कुंभ भारतीय सनातन संस्कृति की आत्मा, इसकी भव्यता के लिए संत समाज एकजुट : श्रीमहंत रविंद्र पुरी

13 अखाड़ों के श्रीमहंतों की मौजूदगी में निकली भव्य शोभायात्रा, नासिक कुंभ का शंखनाद

पुरोहित संघ की शोभायात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब, कुंभ-2027 को लेकर संतों ने दिया एकजुटता का संदेश

त्र्यंबकेश्वर (नासिक)। नासिक कुंभ-2027 की आहट के साथ ही धर्मनगरी त्र्यंबकेश्वर में आस्था और उत्साह का माहौल गूंज उठा। पुरोहित संघ की ओर से निकाली गई भव्य शोभायात्रा में देश के सभी 13 अखाड़ों के प्रमुख श्रीमहंतों और संत-महात्माओं की गरिमामयी मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया। संतों के सान्निध्य में निकली शोभायात्रा ने न केवल कुंभ पर्व की तैयारियों का शंखनाद किया, बल्कि अखाड़ा परंपरा, पुरोहित समाज के समन्वय और सनातन संस्कृति की एकजुटता का संदेश भी दिया।

शोभायात्रा का शुभारंभ 13 अखाड़ों के श्रीमहंतों की उपस्थिति और आशीर्वाद के साथ हुआ। धार्मिक उल्लास के बीच संत-महात्माओं की सहभागिता से त्र्यंबकेश्वर का वातावरण भक्तिमय नजर आया। आयोजन के माध्यम से आगामी नासिक कुंभ के प्रति धार्मिक समाज में जागरूकता और सहभागिता बढ़ाने का संदेश दिया गया।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष समेत प्रमुख संत हुए शामिल

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता का महापर्व है। नासिक कुंभ-2027 को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान करने के लिए संत समाज, अखाड़ों और पुरोहित समाज का आपसी समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन श्रद्धालुओं में आस्था को मजबूत करने के साथ ही हमारी प्राचीन धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन का कार्य करते हैं। कुंभ पर्व की गरिमा और मर्यादा बनाए रखते हुए सभी को मिलकर इसकी तैयारियों में सहयोग करना चाहिए।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि कुंभ भारतीय सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक परंपराओं का विश्वव्यापी प्रतीक है। नासिक कुंभ-2027 को भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए सभी 13 अखाड़ों, संत-महात्माओं और पुरोहित समाज का आपसी समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि त्र्यंबकेश्वर की पावन धरती से निकली शोभायात्रा ने कुंभ के प्रति श्रद्धा, समर्पण और एकजुटता का संदेश दिया है। कुंभ केवल स्नान का पर्व नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं के संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और आध्यात्मिक जागरण का महापर्व है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी मिलकर कुंभ की गरिमा, मर्यादा और दिव्यता को बनाए रखने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।

शोभायात्रा में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के सचिव श्रीमहंत डॉ.रविंद्र पुरी जी महाराज,श्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी जी महाराज,अखाड़ा पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के श्रीमहंत दुर्गादास जी,श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा के श्रीमहंत देवेंद्र दास जी महाराज,नया उदासीन अखाड़ा के मुखिया महंत भगत राम जी महाराज, और श्रीमहंत संक्रांति आनंद जी महाराज,महंत बालवीर गिरी आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे। इनके अलावा अन्य अखाड़ों के प्रमुख महंतों, संतों और धर्माचार्यों ने भी सहभागिता की।

कुंभ की तैयारियों को लेकर एकजुटता का संदेश

नासिक और त्र्यंबकेश्वर का कुंभ पर्व धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। कुंभ में देशभर से साधु-संतों, नागा संन्यासियों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की परंपरा रही है। ऐसे में पुरोहित संघ की ओर से आयोजित शोभायात्रा को कुंभ आयोजन से पहले धार्मिक समाज की सक्रिय भागीदारी और समन्वय की दिशा में अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है।

भगवान त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की पावन नगरी और गोदावरी नदी से जुड़ी आस्था कुंभ पर्व को विशिष्ट पहचान देती है। शोभायात्रा के जरिए कुंभ-2027 को लेकर श्रद्धा, एकता और सनातन परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया गया।

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